Bumla Pass: 1962 मे भारत और चीन के बीच युद्ध कोइ भी सच्चा भारतीय कभी भी नहीं भूल सकता| ‘हिन्दी चीनी भाई भाई’ के नाम पर चीन ने भारत के पीठ मे छूरा घोंपा था| काँग्रेस सरकार की उदासीनता और लापरवाही ने पूरे देश को शर्मसार कर दिया था|
लेकिन भारत के पूर्वोत्तर के सबसे बड़े राज्य अरुणांचाल प्रदेश के बुमला पास मे हुए भयानक युद्ध मे भारतीय सेना ने चीनी सेना को ऐसा सबक सिखाया था जिसे चीनी सेना आज तक नहीं भूल पाई है|
इनके बारे में भी जाने:
- मिरेकल माइक (Miracle Mike)- एक मुर्गा जो बिना सर के 18 महीने तक जीवित रहा
- गढ़कुंडार किला (Garh kundar Fort)- जहाँ से 50 लोगों की एक पूरी बारात गायब हो गई थी
- कुलधरा गांव (Kuldhara Village)- भारत का सबसे भूतिया गाँव
- मायोंग गाँव (Mayong Village)- भारत के काले जादू की राजधानी
- होया बस्यू जंगल (Hoia Baciu Forest)- दुनिया का सबसे डरावना जंगल जहां रहस्यमय तरीके से गायब हो जाते है लोग
- माधापार गांव (Madhapar Village)- दुनिया का सबसे अमीर गाँव
बुमला पास भारत के उन जगहों मे से है जहाँ का मौसम हमेशा असामान्य रहता है| मौसम के अलावा यहाँ पर चीनी खतरा भी हेमशा बना रहता है| 23 अक्टूबर 1962 को बुजदिल चीनी सेना ने रात के अन्धेरे मे बुमला स्थित भारतीय सेना की चौकी पर हमला कर दिया|
उस समय जोगिंदर सिंह के नेतृत्व में 20 सिख सैनिकों ने चीनी सैनिकों के साथ लड़ाई लड़ी थी| हिंदुस्तान के सैनिकों ने भी अपनी देश की मिट्टी को सर मे लगाकर चीनी सेना को मुहतोड़ जवाब देने के लिए रणभूमि मे कूद गए|
भारत के एक एक सैनिक ने ऐसी तबाही मचाई की चीनी सेना हिन्द के सेना के सामने पस्त हो गई| ये पूरी लड़ाई समुद्र तल से 15200 फीट की ऊँचाई पर लड़ी गई थी| यहाँ का सर्द तापमान आपकी हड्डियों को पल भर मे गला सकता है| थोड़ी सी लापरवाही से आपको हाइपोथर्मिया भी हो सकता है या आपकी जान भी जा सकती है|
सर्दियों में बुमला पास का तापमान माइनस 10 डिग्री सेल्सियस हो जाता है| वर्ष 1951 चीन ने अनैतिक तरीके से तिब्बत पर कब्जा कर लिया था और अब उसकी नजर अरुणांचाल प्रदेश के स्वर्ग तवांग पर थी| और इसी मंशा से चीन ने 1962 मे बुमला पास मे रात के अंधेरे मे हमला कर दिया|
बुमला पर हमला करने से पहले चीनी सैनिकों ने नजदीक स्थित नमखाना के कई सारे इलाके कब्जा चुका था लेकिन आबकी बार उसकी नजर पूरे तवांग शहर पर थी| लेकिन चीनियों को नहीं पता था की बुमला पास मे सामना ऐसे शेरों से होने वाला था जो चीन की सेना को छटी का दूध याद दिला देंगे|
200 की संख्या मे चीनी सैनिकों ने रात के अंधेरे मे बुमला पास पर हमला कर दिया| इसी हमले मे सूबेदार जोगेंदर सिंह को मशीन गन से निकली एक गोली उनकी जांघों मे जा लगी| फिर भी भारत माता के इस बहादुर शेर ने लड़ाई जा रखी| जोगेंदर सिंह एक बंकर मे घुसे और अपने जांघों मे पट्टी बांधकर पुनः रणभूमि मे कूद गए|
जोगेंदर सिंह ने पंच और मुक्के से कई चीनी सैनिकों के जबड़े तोड़ दिए| 200 की संख्या मे चीनी सैनिकों से लड़ रहे भारतीय सेना गोला बारूद लगभग खत्म हो चुका था| जोगेंदर सिंह ने बचे हुए सैनिकों को इकट्ठा किया और उनसे बोला की अपना अपना खंजर राइफल के मुंह पर बाँधकर दुश्मनों पर हमला किया जाए|
बचे हुए सेना के जवान खंजर लगी राइफल से जो बोले सो निहाल का नारा लगाकर दुश्मनों के ऊपर टूट पड़ें| इसी बीच चीनी सैनिकों ने जोगेंदर सिंह को बीच युद्ध मे ही बंदी बना लिया| जिसके कुछ देर बाद ये बहादुर जवान भी शहीद हो गया|
और तब से आज तक चीनी सैनिकों इस क्षेत्र मे घुसबैठ करने की हिम्मत नहीं हुई| यहाँ पर साल मे 9 बार भारत और चीन की सेना के बीच मीटिंग होती है जिसे बीपीएल यानी कि बॉर्डर पर्सनल मीटिंग और कहा जाता है|
जब भी आप बुमला पास को घूमने जाए उस दिन ये निश्चित कर लें की आसमान पूरी तरह साफ हो ताकि आपकी यात्रा मे कोइ विघ्न न आए| यह पूरा दर्रा अपनी प्राकृतिक और अद्भुत सुंदरता के लिए जाना जाता है|
तवांग से 37 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ये दर्रा सुंदरता का भंडार है| 37 किलोमीटर के इस सफर मे आप अपनी पलकें भी नहीं झपका पाएंगे| तवांग से लेकर बुमला दर्रे तक का रास्ता प्राकृतिक सुंदरता से पूरी तरह भरा हुआ है|
जब भी आपका अरुणांचाल प्रदेश के छिपे हुए स्वर्ग तवांग घूमने की योजना हो तो तवांग के साथ साथ आपको वीरों की भूमि बुमला पास मे एक बार जरूर जाना चाहिए| आप आपणए बच्चों को दर्रे मे जाकर भारतीय सेना की बहादुरी के किस्से सुना सकते हैं|
बुमला पास मे ठंड बहुत ज्यादा रहती है इसलिए यहाँ पर जाने से पहले अपने साथ गरम कपड़े, शाल और दस्ताने वगैरह साथ मे लाकर जाएं| एक घंटे का आपका सफर रास्ते की अपार, अद्भुत और आलोकिक सुंदरता देखते देखते ही बीत जाएगा|
Bumla Pass Permit
इस पास को तवांग ज़िले मे स्थित डिप्टी कमिश्नर के कार्यालय और भारतीय सेना की छावनी से परमिट लेकर ही देखा जा सकता है|
How To Reach Bumla Pass
बुमला पास तक पहुँचने के लिए आपको सबसे पहले तवांग शहर तक आना होगा| तवांग शहर का नजदीकी रेलवे स्टेशन असम का गुवाहाटी रेलवे स्टेशन है| अगर आप गुवाहाटी रेलवे स्टेशन के लिए ट्रेन टिकट बुक करना चाहते हैं यहाँ पर क्लिक करें|
Bumla Pass Location
Q1- बुमला दर्रा (Bumla Pass) किस लिए प्रसिद्ध है?
A- अपनी आलोकिक प्राकृतिक सुंदरता के लिए
Q2- बुमला दर्रे (Bumla Pass) की ऊंचाई कितनी है?
A- समुद्र तल से 15,200 फीट की ऊंचाई पर स्थित है।
Q3- बुमला दर्रा (Bumla Pass) कहाँ स्थित है?
A- अरुणांचाल प्रदेश के तवांग जिले मे
Q4- क्या अप्रैल में बुमला दर्रे (Bumla Pass) में बर्फ है?
A- हां, बुमला दर्रे में अप्रैल के मध्य तक बर्फबारी देखने को मिल सकती है
Q5- बुमला दर्रा (Bumla Pass) कब जाना है?
A- बुमला दर्रे पर मई से अक्टूबर के महीने में जाना सबसे अच्छा माना जाता है।