धुड़मारास गांव (Dhudmaras Village)- दुनिया के टॉप 20 में शामिल हुआ भारत का यह गांव

भारत की आत्मा यहाँ पर स्थित 6 लाख से ज्यादा गांवों मे निवास करती है| इन्ही 6 लाख गांवों मे छत्तीसगढ़ मे स्थित एक गाँव ने दुनिया के सबसे अच्छे 20 गांवों मे अपनी जगह बनाया है उस गाँव का नाम धुड़मारास हैं|धुड़मारास गांव छत्तीसगढ़ प्रदेश के बस्तर जिले मे स्थित है|

धुड़मारास गांव को संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन (UNWTO) ने 60 देशों के बेस्ट टूरिज्म विलेज की टॉप 20 की सूची मे शामिल किया है जो की हर एक भारतवासी के लिए एक बहुत ही गर्व का विषय है|

कांगेर नदी के किनारे बसा धुड़मारास गांव एक आदिवासी बाहुल्य इलाका है जो अपनी अद्भुत सांस्कृतिक विरासत, हरियाली और अपनी अप्रतिम प्राकृतिक सुंदरता के लिए इस सूची मे शामिल किया गया है|

इनके बारे में भी जाने:

आपको जानकार आश्चर्य होगा की चारों तरफ नदी पहाड़ से घिरा हुया ये गाँव आपको गूगल मैप पर भी नहीं दिखेगा| धुड़मारास गांव की डिटेल्स ना ही आपको राजस्व विभाग मे मिलेगी और ना ही किसी वन विभाग के नक्शे मे|

इतना सब होने के बावजूद इस गाँव ने अपने आपको विश्व पटल पर स्थापित किया है| धुड़मारास गांव का ये एचीवमेंट स्थानीय लोगों के सामूहिक परिश्रम और एकजुटता का परिणाम है| यहाँ के स्थानीय लोग यहाँ पर आए पर्यटकों को प्रकृति को गहराई से जानने मे मदद करते हैं|

अगर आप लगातार समाचार देखते हैं तो आपको पता होगा की बस्तर जिला लंबे समय तक नक्सलवाद से प्रभावित रहा है और आज इसी बस्तर जिले के एक गाँव का पर्यटन दुनिया भर मे अपना डंका बजा रहा है| ये स्थानीय लोगों के मेहनत का नतीजा है| अब ये गाँव अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों के स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार है|

जैसे ही आप इस गाँव मे प्रवेश करते हैं तो एक खूबसूरत द्वार आपका स्वागत करता है जिसमे लिखा होता है धुरवा डेरा| यहाँ की स्थानीय जनजाति को धुरवा कहते हैं और चूंकि वो यहाँ पर रहते हैं इसलिए इसको धुरवा डेरा कहा जाता है|

इस डेरे के अंदर ठहरने के लिए आपको कई सुंदर होम स्टे मिलेंगे जिसकी दीवारें बांस की चटाई और लाल ईंट से बनी हुई होती है| इन होम स्टे की छावनी पत्थरों की बनी हुई होती है| ये होम स्टे गाँव के स्थानीय लोग अपने अपने घरों मे बनवाते हैं|
धुड़मारास गांव मे आपको भोजन के लिए बड़े बड़े होटेल्स या रेस्टो नहीं मिलेंगे बल्कि स्थानीय निवासी यहाँ के जंगलों मे उपलब्ध व्यंजनों से चूल्हे मे भोजन तैयार करते हैं जो की बेहद ही लजीज और स्वादिष्ट होता है| भोजन मे आपको फरा, रोटी, चावल और लाल चींटी की चटनी खाने को मिल सकती है|

स्थानीय निवासी प्रकृति की रक्षा अपने बच्चे की तरह करते हैं| यहाँ पर पर्यटकों को बिना प्रकृति को नुकसान पहुंचाए तरह तरह की ऐक्टिविटी कराई जाताई है| बीचों बीच बहती कांगेर नदी इस गाँव की सुंदरता मे चार चाँद लगा देती है|

नदी मे कयाकिंग और बम्बू राफ्टिंग जैसी गतिविधियाँ भी होती हैं| होम स्टे, भोजन, पारम्परिक भोजन, नदी ऐक्टिविटी और गाइड के काम से इस गाँव के युवाओं को अच्छी आमदनी मिलती है जिससे ग्रामीणों के जीवन मे जबरदस्त सुधार हो रहा है|

ईको टूरिज्म डेवलपमेंट कमेटी कांगेर नदी मे ऐक्टिविटी का काम देखती है इसके साथ साथ ये कमेटी पर्यटकों के लिए वेटिंग रूम और ज्यादा संख्या मे टॉयलेट्स का भी निर्माण करा रही है| इस गाँव मे आप ट्रेकिंग, बर्ड वाचिंग जैसी ऐक्टिविटी भी कर सकते हैं|

आज की तारीख मे इस गाँव मे 40 परिवार रहते हैं और हर एक घर से एक सदस्य ईको टूरिज्म डेवलपमेंट कमेटी मे शामिल है| इस गाँव मे पर्यटन की शुरुआत होम स्टे से हुई थी| पलायन से ये गाँव बेहद परेशान था और पलायन रोकने के लिए गाँव वाले कुछ नया करना चाहते थे| इसकी शुरुआत गाँव वालों ने घरों मे होम स्टे बनाकर की| होम स्टे बनने से धीरे धीरे इस गाँव मे पर्यटक आने लगें|

इस गाँव मे आकर आप अपने आप को प्रकृति के बेहद ही करीब पाएंगे| इस गाँव के पास एक साइक्लिंग फैक्ट्री भी लगाई जा रही है जिससे यहाँ के वेस्ट को अच्छे से मैनेज किया जा सके| इस गाँव को दिल्ली मे भी सम्मानित किया जा चुका है|
पिछले साल 2024 मे 27 सितंबर को विश्व पर्यटन दिवस पर धुड़मारास गाँव को भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय ने सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांव का पुरस्कार से नवाजा था| प्रकृति प्रेमियों और शांति की तलाश मे जो लोग हैं उनके लिए ये जगह एक स्वर्ग के समान है|

करीब 240-250 की आबादी वाला ये गाँव आज विश्व पटल पर अपनी सकारात्मक पहचान बना रहा है| यहा गाँव मात्र 5 पीढ़ी पुराना है जो अंग्रेजों के समय पर बसाया गया था| बारिश के लगभग 2-3 महीने हटा लिया जाए तो लगभग 2000-2500 पर्यटक हर महीने यहाँ पर पहुँच रहे हैं|

यहाँ के SDM सुभ्रत प्रधान के अनुसार जल्द ही इस गाँव का नक्शा बना लिया जाएगा| यह गाँव जगदलपुर से महज 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है| मीडिया और सोशल मीडिया पर अपनी चमक बिखरने के बाद ये गाँव अब भारी संख्या मे पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है|

प्रशासन भी इस गाँव के विकास मे सहयोग कर रहा है ताकि देशी और विदेशी पर्यटक यहाँ तक आसानी से पहुँच सकें| इस जगह मे आपको कई तरह तरह के पक्षियों को भी देखेंगे| बहुत जल्द ही ये गाँव बस्तर की एक बड़ी पहचान बनेगा|

धुड़मारास गांव (Dhudmaras Village) कैसे पहुँचें

धुड़मारास गांव का नजदीकी रेलवे स्टेशन जगदलपुर है जो यहाँ से महज 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है| अगर आप जगदलपुर के लिए ट्रेन टिकट बुक करना चाहते हैं तो यहाँ पर क्लिक करें|

Scroll to Top