कर्दमेश्वर मंदिर (Kardameshwar Temple)- एक मंदिर जिसने भगवान राम को ब्रह्मदोष से मुक्त किया था

Kardameshwar Temple: भारत की आध्यात्मिक राजधानी काशी का पुरे विश्व मे मशहूर है जो दुनिया के सबसे पुराने शहरों मे से एक है| काशी नगरी अपने सुंदर गंगा घाटों, गंगा आरती और विश्वनाथ मंदिर के लिए दुनिया भर मे जानी जाती है|

लेकिन काशी की धरती पर एक ऐतिहासिक मंदिर और है जो विश्वनाथ मंदिर से भी ज्यादा पुराना है और जिसका संबंध मर्यादा पुरषोत्तम भगवान श्री राम से है|

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मोक्ष दायिनी काशी भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है और ऐसा मन जाता है की काशी भगवान शिव के त्रिशूल पर टिकी हुई है| काशी मे इंसानों को विभिन्न दोषों से मुक्ति मिलती है| काशी मे एक ऐसा ही ऐतिहासिक मंदिर है जहाँ पर हत्या के पाप से भी मुक्ति मिलती है| इस मंदिर का नाम कर्दमेश्वर महादेव मंदिर है|

इस मंदिर का वर्णन काशी खंड और पंचक्रोशी महात्म्य में भी मिलता है| काशी की पंचकोसी परिक्रमा पूरी दुनिया मे मशहूर है और इस मंदिर का पहला पड़ाव ही कर्दमेश्वर मंदिर है| पंचक्रोशी परिक्रमा के दौरान भक्तगण इस मंदिर पर एक दिन का आराम करते हैं|

किवंदती के अनुसार ऋषि कर्दम ने इस जगह पर शिवलिंग की प्राण प्रतिष्ठा करके स्थापना की थी| यही कारण है की इस मंदिर का नाम कर्दमेश्वर महादेव मंदिर पड़ा| ऋषि कर्दम ने इस जगह पर कठिन तपस्या की थी|

जब ऋषि तपस्या मे लीन थी तो किसी वजह से उनकी आँखों मे आँसू आ गए और उन्ही आसुओं से एक सुंदर सरोवर का निर्माण हुआ| ऐसा माना जाता है की इस सरोवर मे जिस भी इंसान का प्रतिबिंब दिख जाता है उसकी उम्र बढ़ जाती है| लेकिन इतिहास की माने तो इस कुंड का निर्माण 18वीं शताबदी के मध्य में बंगाल की रानी भवानी रानी ने करवाया था|

ऐसा भी माना जाता है की इस मंदिर का निर्माण चंदेल के शासकों ने करवाया था| इस मंदिर मे दर्शन मात्र से देवों के ऋण से मुक्ति प्राप्त हो जाती है| धर्म शास्त्रों के अनुसार जगत पालक विष्णु के रूप भगवान राम ने जब लंकापति रावण का वध किया तो उन पर ब्रह्म दोष लगा था|

इस दोष को मिटाने के लिए गुरु वशिष्ट ने भगवान राम को परिवार सहित काशी जाकर इस मंदिर मे पूजा अर्चना के लिए बोला| इस मंदिर मे पूजा करने और परिक्रमा करने के बाद भगवान राम ब्रह्म दोष से मुक्ति मिली| तब से इस जगह पर परिक्रमा की परंपरा चलती आ रही है|

नागर शैली मे निर्मित ये मंदिर ऐतिहासिक रूप से बारहवीं शताब्दी मे बना था| ये मंदिर पंचरथ प्रकार का है। पंचरथ का अर्थ है की इस मंदिर में एक ही चबूतरे पर मंदिर के पांचों अंग गर्भगृह, प्रदक्षिणा पथ, अंतराल, महामण्डप और अर्द्धमण्डप को बनवाया गया है। कर्दमेश्वर मंदिर एक पूर्वमुखी मंदिर है।

इस मंदिर के पुजारी मुन्नू गिरी के अनुसार कर्दम ऋषि ने की हजारों सालों तक यहाँ पर कठिन तपस्या की थी| उसकी तपस्या से खुश होकर भगवान विष्णु प्रकट हुए और भगवान ने उनको वर मांगने को बोला|

ऋषि कर्दम और उनकी धर्मपत्नी देहुति ने जगत पालक भगवान विष्णु से पुत्र प्राप्ति की इच्छा प्रकट की| भगवान विष्णु के आशीर्वाद से ऋषि कर्दम और देहुति से एक पुत्र प्राप्त हुआ जिसका नाम कपिल मुनि रखा गया| इन्ही कपिल मुनी ने अपने पिता को सांख्य दर्शन का ज्ञान दिया था।

इस मंदिर की स्थापना काशी के ही विश्व प्रसिद्ध मंदिर से पहले हुई थी| कर्दमेश्वर मंदिर मुख्य द्वार 3 फीट 5 इंच चौड़ा और 6 फीट ऊंचा है| वर्तमान समय में इस मंदिर की देख-रेख का कार्य उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व विभाग द्वारा सफलता पूर्वक किया जा रहा है।

मंदिर का गर्भगृह 12 फीट चौड़ा और 12 फीट लंबा है जबकि गर्भगृह के अंदर चौड़ाई और लंबाई 8-8 फीट है| इसी गर्भगृह मे शिवलिंग स्थापित है जिसमे 6 फीट की ऊँचाई से एक जलधारा शिवलिंग का 24 घंटे जलाभिषेक करती है|

जब भी आपका काशी आगमन हो तो गंगा स्नान, गंगा आरती और बाबा विश्वनाथ के दर्शन के साथ साथ कर्दमेश्वर मंदिर पहुंचकर शिवलिंग मे गंगा जल जरूर चढ़ाएं| इस मंदिर मे आकार आपको एक अद्भुत और आध्यात्मिक शांति की प्राप्ति होगी| इस मंदिर मे शिवरात्रि और हर सोमवार को भक्तों की जबरदस्त भीड़ रहती है|

कर्दमेश्वर मंदिर कैसे पहुँचें (How To Reach Kardameshwar Temple)

कर्दमेश्वर मंदिर वाराणसी मे बाबा विश्वनाथ के मंदिर से महज 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है| इस मंदिर पर पहुँचने के लिए सबसे पहले आपको वाराणसी आना होगा| वाराणसी तक आप रेल या वायु मार्ग से आ सकते हैं| अगर आप वाराणसी के लिए ट्रेन टिकट बुक करना चाहते हैं तो यहाँ पर क्लिक करें|

कर्दमेश्वर मंदिर की लोकेसन (Kardameshwar Temple Location)

 

Q1- कर्दमेश्वर मंदिर (Kardameshwar Temple) मे किस ऋषि ने तपस्या की थी|

A- ऋषि कर्दम ने|

Q2- कर्दमेश्वर मंदिर (Kardameshwar Temple) किस परिक्रमा का हिस्सा है?

अ- पंचकोसी परिक्रमा का

Q3- कर्दमेश्वर मंदिर (Kardameshwar Temple) कौन से भगवान ब्रह्मदोष से मुक्त हुये थे?

A- भगवान राम

Q4- कर्दमेश्वर मंदिर (Kardameshwar Temple) की शैली मे बना मंदिर है?

A- नागर शैली मे

Q5- कर्दमेश्वर मंदिर (Kardameshwar Temple) कब बना था?

A- बारहवीं शताब्दी मे

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