Mana Village: भारत के उत्तराखंड मे चमोली जिले मे स्थित माणा गाँव अपनी कई खूबियों के लिए जाना जाता है| माणा गांव को भारत वर्ष का पहला गाँव बोला जाता है| माणा गांव भारत के पवित्र 4 धामों मे से एक बद्रीनाथ से लगभग 3 किलोमीटर दूरी पर स्थित है| इस गाँव से भारत चीन सीमा की दूरी महज 24 किलोमीटर है|
इनके बारे में भी जाने:
- मधेश्वर पहाड़ (Madheshwar Pahad)- गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुआ दुनिया का सबसे बड़ा प्राकृतिक शिवलिंग
- फतेह बुर्ज (Fateh Burj)- कुतुब मीनार से भी ऊंचा बुर्ज जहाँ पर सिक्ख वीरों के सामने मुगलों ने घुटने टेक दिए थे
- न्यू पंबन ब्रिज (New Pamban Bridge)- एशिया का पहला वर्टिकल रेल ब्रिज जो जहाज आते ही खुल जाएगा
- सतरेंगा (Satrenga)- छत्तीसगढ़ का मिनी गोवा
- अल हुतैब गांव (Al Hutaib Village)- एक ऐसा गाँव जहाँ पर आज तक बारिश नहीं हुई है
- डोंग घाटी (Dong Valley)- भारत की एक ऐसी घाटी जहाँ पर सबसे पहले सूरज की किरने पहुँचती हैं
उत्तराखंड में 3219 मीटर की ऊंचाई पर स्थित माणा गांव को 21 अक्टूबर 2022 से पहले भारत का आखिरी गाँव बोला जाता था लेकिन 21 अक्टूबर 2022 को माणा मे आयोजित हो रहे एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति मे माणा को भारत के अंतिम गांव बोलने के बजाय देश का पहला गांव कहे जाने पर अपनी सहमति दे दी।
देश का पहला गांव बनने के बाद माणा को देश और दुनिया में जाना जाने लगा और गूगल मे भी लोग इस गाँव को ढूँढने लगें| प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण मे बॉर्डर पर स्थित सभी गाँववों को देश का पहला गाँव कहा|
इस पहाड़ी गाँव का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा हुआ है| ऐसा माना जाता है की से पांडवों ने स्वर्ग की यात्रा की शुरुआत इसी गाँव से की थी| यह पूरा गाँव चारों तरफ से हिमालय की खूबसूरत वादियों से घिरा हुआ है|
इस गाँव के कण कण मे देवताओं का वास है| जिसने सदियों पुरानी परंपरा और संस्कृति को बचाए रखा है| प्रधान मंत्री मोदी ने इस गाँव को आखरी स्थान से पहली पंक्ति पर लाकर खड़ा कर दिया है| बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइज़ेशन (BRO) ने इस गांव में ‘भारत का प्रथम गांव माणा’ बोर्ड भी लगा दिया है|
इस ऐतिहासिक और हिमालयी गाँव का वातावरण बहुत ही साफ-सुथरा है इसी कारण से वर्ष 2019 के स्वच्छ भारत सर्वे में इसे भारत का ‘सबसे साफ गांव’ का दर्जा मिला था| इसी माणा गाँव से पवित्र सरस्वती नदी का उद्गम होता है| माणा गाँव से 40 किलोमीटर दूर तिब्बत सीमा की तरफ स्थित सरस्वती कुंड से सरस्वती नदी का उद्गम होता है|
ऐसा माना जाता है की वेदब्यास जब इस जगह पर भगवान गणेश जी से महाभारत लिखवा रहे थे तो सरस्वती नदी बहुत शोर कर रही थी| वेदब्यास के निवेदन करने पर भी उनका शोर शांत नहीं हुआ तो आवेग मे आकर वेदब्यास ने ने सरस्वती नदी को श्राप दे दिया की उनका मान सम्मान यहीं पर थम जाएगा|
और हुआ भी ऐसा ही आगे जाकर सरस्वती अलकनंदा नदी मे मिल जाती है लेकिन इसका रंग नहीं दिखता फिर सरस्वती सीधे तीर्थराज प्रयागराज मे त्रिवेणी संगम मे प्रकट होकर गंगा और यमुना के साथ संगम बनाती है|
माणा गांव (Mana Village) साल के 6 महीने बर्फ से ढका रहता है| 1962 मे भारत चीन के युद्ध के पहले माणा गाँव तिब्बत से व्यापार का प्रमुख केंद्र हुआ करता था। 1962 के युद्ध के बाद ब्यापार और तिब्बतियों की आवाजाही पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई थी|
आज भी ये गाँव देश विदेश से लाखों पर्यटकों और श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है| इस गाँव का सीधा संबंध पवित्र बद्रीनाथ मंदिर से है| बद्रीनाथ मंदिर का पट बंद होने के बाद भगवान बद्री के लिए घृत कंबल भी माणा गांव की महिलाओं द्वारा तैयार किया जाता है|
माणा गाँव (Mana Village) मे भोटिया जनजाति के लोग रहते हैं| इस गाँव को लेकर एक बेहद ही रोचक मान्यता प्रचलित है| ऐसा माणा जाता है की जो भी इस गाँव मे आता है उसकी गरीबी दूर हो जाती है| इसके पीछे देवों के देव महादेव का इस गाँव को प्राप्त आशीर्वाद है|
भारत के पहले गांव में एक आखिरी दुकान भी है। जहां पर फोटो क्लिक करवाने के लिए पर्यटक दूर-दूर से इस दुकान पर पहुंचते हैं। यहाँ पर आप गरमा गरम चाय का लुत्फ उठा सकते हैं| माणा गाँव मे एक बड़ा सा पत्थर पुल बना हुआ है जिसे लोग भीम पुल भी कहते हैं|
ऐसा माना जाता है की इस पुल का निर्माण भीम ने किया था| ये एक परकार का बड़ा पत्थर है जो ससर्वती नदी के ऊपर रखा हुआ है जिसका इस्तेमाल एक पुल की तरह किया जाता है| ये पुल माणा गाँव के सबसे आकर्षक स्थलों मे से एक है|
पौराणिक कथाओं की माने तो जब सभी पांडव राजपाठ छोड़कर स्वर्ग की ओर प्रस्थान कर रहे थे तो बीच मे सरस्वती नदी आ गई और द्रोपदी को सरस्वती नदी पर करने मे थोड़ी समस्या हो रही थी| द्रोपदी की समस्या को देखते हुए भीम ने एक बड़ा ससी चट्टान उठकर नदी के ऊपर रख दिया|
इस चट्टान को कुछ ऐसे रखा गया था की ये एक पुल की तरह काम कर सके और हुआ भी ऐसा ही| इस पुल के जरिए द्रोपदी ने सरस्वती नदी को पार कर लिया| तब से लेकर आजतक ये पुल पर्यटकों के बीच बेहद ही लोकप्रिय है|
ऐसा भी माना जाता है की महर्षि वेदब्यास ने भगवान गणेश से रामायण इसी पुल के ऊपर बैठकर लिखवाई थी| इस गाँव मे नीलकंठ चोटी, तप्त कुंड, गणेश गुफा, व्यास गुफा, भीम पुल और सरस्वती मंदिर जैसे कई बेहतरीन पर्यटन स्थल हैं|
इस गाँव को हिन्दू पुराणों मे मणिभद्रपुरम कहा गया है| मणिभद्रपुरम नाम ‘मणिभद्र आश्रम’ से लिया है। स्थानीय निवासी मणिभद्र यक्ष देवता को गांव का संरक्षक देवता भी माना करते थे|
माणा गांव कैसे पहुँचें (How To Reach Mana Village)
माणा गाँव (Mana Village) का नजदीकी रेलवे स्टेशन 275 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हरिद्वार का रेलवे स्टेशन है वहीं नजदीकी हवाई अड्डा 341 किलोंईटर की दूरी पर स्थित देहरादून का हवाई अड्डा है| अगर आप हरिद्वार के लिए ट्रेन टिकट बुक करना चाहते हैं तो यहाँ पर क्लिक करें|
माणा गांव की लोकेसन (Mana Village Location)
Q1- माना गांव (Mana Village) किस लिए प्रसिद्ध है?
A- उत्तराखंड स्थित ये भारत का पहला गांव है जहाँ पर महाभारत लिखी गई थी
Q2- माणा गांव (Mana Village) के पास कौन सा रेलवे स्टेशन है?
A- हरिद्वार रेलवे स्टेशन
Q3- चीन बॉर्डर से माणा गांव (Mana Village) कितनी दूर है?
A- 24 किलोमीटर
Q4- माणा गांव (Mana Village) की यात्रा कैसे करें?
A- इसके लिए सबसे पहले आपको हरिद्वार रेलवे स्टेशन पहुंचना होगा
Q5- भारत वर्ष का पहला गाँव कौन सा है?
A- माना गाँव (Mana Village)
इनके बारे में भी जाने:
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