Mattur Village: जब भी देववाणी संस्कृत की बात होती है तो एक आम भारतीय युवा अपने स्कूल के दिनों की यादों मे खो जाता है| संस्कृत भाषा कक्षा 5 से कक्षा 10 तक के विद्यार्थियों को पढ़ाई जाती है| उसके बाद संस्कृत केवल घर या दफ्तर मे हो रही पूजा के मंत्रों मे सुनने को मिलती है|
ये हमारे देश की विडंबना है की दुनिया की सबसे प्राचीन भाषा और सभी भाषाओं की जननी आज विलुप्त होने की कगार पर है| हम अपनी प्राचीन भाषा को बचा नहीं पा रहे| एक तरफ दक्षिण के कुछ राज्यों मे राष्ट्र भाषा का विरोध दूसरी तरफ संस्कृत का विलुप्त होना| हम अपनी ही संस्कृति से दिन प्रतिदिन दूर होते जा रहे हैं|
लेकिन भारत के दक्षिण मे स्थित कर्नाटक प्रदेश के शिमोगा जिले मे स्थित मात्तूर गाँव आज भी संस्कृत भाषा की अलख जगाए हुए हैं| मत्तूर गाँव के स्थानीय निवासी आज भी बोलचाल मे देववाणी संस्कृत भाषा का इस्तेमाल करते हैं|
इनके बारे में भी जाने:
- माणा गांव (Mana Village)- भारत का पहला और महाभारत काल का गाँव जहाँ से सरस्वती नदी का उद्गम होता है
- देवमाली गांव (Deomali Village)- राजस्थान का एक अनोखा गाँव जहाँ करोड़पति के पास भी नहीं है पक्का मकान
- ऑकिगहरा जंगल (Aokigahara Forest)- मौत का जंगल जहाँ जाने वाला हर शख्स कर लेता है आत्महत्या
- सतरेंगा (Satrenga)- छत्तीसगढ़ का मिनी गोवा
- अल हुतैब गांव (Al Hutaib Village)- एक ऐसा गाँव जहाँ पर आज तक बारिश नहीं हुई है
- डोंग घाटी (Dong Valley)- भारत की एक ऐसी घाटी जहाँ पर सबसे पहले सूरज की किरने पहुँचती हैं
मत्तूर गांव के बारे मे अगर आप गूगल पर सर्च करेंगे तो पाएंगे की मत्तूर गाँव पूरे कर्नाटक प्रदेश का सबसे सुंदर गाँव है जो तुंगा नदी के किनारे बसा हुआ है| इस गाँव मे लोग दूर दूर से संस्कृत भाषा को सीखने के लिए आते हैं|
गाँव का हर एक निवासी चाहे हो हिन्दू हो, या मुसलमान हो, सिक्ख हो या ईसाई हो हर कोइ संस्कृत भाषा मे बात करता है| इस अद्भुत गाँव मे न ही कोई रेस्तरां है और न ही कोई गेस्ट हाउस या होटल है| जो भी इंसान यहाँ पर संकृत सीखने आता है यहाँ के लोग उसे अपना मेहमान बनाकर रखते हैं और अपने देश की परंपरा “अतिथि देवो भवः”का निर्वहन करते हैं|
इस गाँव मे 5 साल के बच्चे से लेकर 80 साल के बुजुर्ग भी बोलने मे संस्कृत भाषा का इस्तेमाल करते हैं| अप इस गाँव मे आकर मात्र 20 दिन मे फर्राटेदार संस्कृत मे बात करना सीख जाएंगे| यहाँ के निवासी आधनुक तकनीक का भी बाड़ी ही खूबसूरती से इस्तेमाल कर रहे हैं|
यहाँ रहने वाले लोग स्काईप जैसे सॉफ्टवेयर की सहायता से विदेश मे बैठे लोगों को मुफ़्त मे संस्कृत भाषा सीखा रहे हैं| स्थानीय लोगों की माँने तो लगभग 600 वर्ष पूर्व केरल के कुछ ब्राह्मण परिवार इस गाँव मे रहने आए थे और वो लोग आपस मे संस्कृत भाषा मे बात करते थे|
संस्कृत के अलावा वो लोग संकेथी में भी बाते करते थे| संकेथी कोई एक अलग प्रकार की भाषा नहीं है बल्कि ये संस्कृत, तमिल, कन्नड़ और तेलगू का मिश्रण है| इस भाषा की आज तक कोई पांडुलिपी नहीं बनी हैइसलिए इसे पढ़ने और लिखने के लिए देवनगरी का इस्तेमाल किया जाता है|
मत्तूर गाँव मे एक स्कूल और मंदिर है जहाँ पर विद्यार्थियों को वेदों की शिक्षा दी जाती है| इस गाँव मे हर एक परिवार का कम से कम एक सदस्य सॉफ्टवेयर इंजीनियर है जबकि लहभग 30 से ज्यादा नागरिक कुवेम्पु, बेंगलुरु, मैसूर और मंगलौर के यूनिवर्सिटी में संस्कृत के बड़े प्रोफेसर हैं|
मत्तूर गाँव कर्नाटक की राजधानी बंगलोर से लगभग 300 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है| 2011 के सेंसस के अनुसार इस गाँव की आबादी महज 3000 है| यह भारत का आखिरी गाँव है जहाँ संस्कृत भाषा बोलचाल मे इस्तेमाल की जाती है| मत्तूर एक कृषि पर आधारित गांव है जहाँ के लोग धान और सुपारी की बहुतायत मे खेती करते हैं।
इस गाँव मे घुसते ही आपको एक अलग स एहसास होगा| आपको ऐसा प्रतीत होगा की जैसे आप किसी टाइम मशीन मे यात्रा करके सदियों पीछे आ गए हों| मत्तूर गाँव के लोगों ने बहुत समय से अपनी प्राचीन सभ्यता और संस्कृति को सहेजकर रखा है|
जब भी आप इस गाँव का भ्रमण करने निकलेंगे तो आपको हर घर से पवित्र मंत्रों की आवाज आएगी जो आपके तन और मन को पूरी तरह शुद्ध कर देगी| सड़कों पर घूम रहे बच्चे आपको धोती मे मिलेंगे और उनके सर पर शिखा भी होगी| यहाँ पर आपको प्राचीन भारत की तरह पेड़ के नीचे चल रहे गुरुकुल भी दिखेंगे|
एक्सपर्ट्स का कहना है कि संस्कृत सीखने से गणित और तर्कशास्त्र के ज्ञान मे अदम्य बढ़ोत्तरी होती है| जो लोग वैदिक गणित सीख लेते हैं उन्हे जीवन मे भी भी कैलक्यूलेटर की आवश्यकता नहीं पड़ती| ऐसा नहीं है की इस गाँव के लोग केवल संस्कृत ही जानते हैं| इस गाँव के लोग फर्राटेदार अंग्रेजी भी बोलते हैं और मॉडर्न टेक्नॉलजी का इस्तेमाल भी करते हैं|
ऐसा बताया जाता है की 1980 के पहले यहाँ के लोग कन्नड और संकेथी भाषा मे बात करते थे| 1980 मे ही यहाँ पर संस्कृत भारती संस्था की स्थापना की गई| इस संस्था ने ये तय किया की बोलचाल की भाषा मे संस्कृत भाषा का इस्तेमाल किया जाए| इस संस्था ने स्थानीय निवासियों के साथ मिलकर काम किया और देखते ही देखते पूरा गाँव संस्कृत मे बात करने लगा|
जब भी आपका बैंगलोर घूमने का प्लान बने तो बैंगलोर से महज 300 किलोमीटर दूर इस आलोकिक और अनोखे गाँव मे जरूर घूमें|
मत्तूर गांव का नजदीकी रेलवे स्टेशन (Mattur Village Nearest Railway Station)
मत्तूर गाँव (Mattur Village) का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन यहाँ से 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित शिमोगा रेलवे स्टेशन है जिसका रेलवे कोड SMET है| अगर आप शिमोगा रेलवे स्टेशन के लिए ट्रेन टिकट बुक करना चाहते हैं तो यहाँ पर क्लिक करें|
मत्तूर गांव का मैप (Mattur Village Map)
Q1- मत्तूर गांव (Mattur Village) क्यों प्रसिद्ध है?
A- इस गाँव मे हर संस्कृत भाषा मे बात करता है|
Q2- किस गांव में लोग केवल संस्कृत बोलते हैं?
A- कर्नाटक के मत्तूर गांव (Mattur Village) मे|
Q3- मत्तूर विलेज (Mattur Village) में संस्कृत कोर्स की फीस क्या है?
A- यहाँ संस्कृत सीखना पूरी तरह मुफ़्त है|
Q4- मत्तूर गांव (Mattur Village) किस नदी के किनारे बसा हुआ है?
A- तुंगा नदी के किनारे
Q5- मत्तूर गांव (Mattur Village) की प्राचीन भाषा क्या थी?
A- संकेथी भाषा
इनके बारे में भी जाने:
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- माधुरी झील (Madhuri Lake)- रहस्यों से भरी एक झील जिसका निर्माण एक रात मे हुआ है
- चुमी ग्यात्से झरना (Chumi Gyatse Falls)- LAC पर स्थित एक चमत्कारिक झरना जिसे चीन हड़पना चाहता है
- रूपकुंड झील (Roopkund Lake)- नरकंकालों से भरी हुई भारत की एक रहस्यमयी झील
- धुड़मारास गांव (Dhudmaras Village)- दुनिया के टॉप 20 में शामिल हुआ भारत का यह गांव
- बुमला दर्रा (Bumla Pass)- जहां एक अकेले सरदार ने तोड़ दिया था 100 चीनी सैनिकों का घमंड