ताम्बडी सुरला महादेव मंदिर (Tambadi Surla Mahadev Temple)- गोवा का सबसे पुराना मंदिर

Tambadi Surla Mahadev Temple: अगर आप इतिहास मे रुचि रखते हैं और लगातार सोशल मीडिया मे ऐक्टिव रहते हैं तो जानते होंगे की सनातन धर्म के मंदिरों को सबसे ज्यादा मुस्लिम शासकों ने ध्वस्त किया है| जिस समय मुग़ल पूरे देश मे मंदिरों को ध्वस्त कर रहे थे ठीक उसी समय पर पुर्तगाली भी गोवा मे हिन्दू धर्म के मंदिरों को ध्वस्त कर रहे थे|

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वैसे तो गोवा एक पार्टी करने और मौज मस्ती करने वाली जगह है लेकिन एक समय था जब पूर्तगालियों ने 450 साल तक शासन करके पूरे गोवा को मंदिरों से विहीन कर दिया था| लेकिन एक मंदिर था जो काभी भी पूर्तगालियों के हाँथ नहीं आया|

उस मंदिर का नाम है ताम्बडी सुरला मंदिर| ताम्बडी सुरला मंदिर हिन्दुओ के सर्वोच्च भगवान देवों के देव महादेव को समर्पित है| घने जंगलों मे होने के कारण आक्रमणकारी पुर्तगाली इस पवित्र मंदिर तक पहुँच नहीं सके|

प्राचीन समय मे गोवा अपने ढेर सारे विराट मंदिरों के लिए जाना जाता था| लेकिन मुस्लिम और पूर्तगालियों के बीच हुई लड़ाई मे सभी मंदिरों को तोड़ दिया गया था| लेकिन ताम्बडी सुरला मंदिर इन आक्रमणकारियों से खुद को बचाने मे सफल रहा| अकेले पुर्तगाल के आक्रमणकारी सैनिकों ने 350 से ज़्यादा सनातन धर्म के मंदिरों को नष्ट कर दिया था|

ताम्बडी सुरला महादेव मंदिर का इतिहास (Tambadi Surla Mahadev Temple History)

यह एक 12वीं सदी का मंदिर है| अगर आप इतिहास को और गहराई से जानने का प्रयास करेंगे तो आप जानेंगे की इस मंदिर का निर्माण बेसाल्ट से कदंब शैली मे किया गया है| उस समय बेसाल्ट दक्कन के पठार से लाया गया था| यह मंदिर ढक्कन के पठार और पहाड़ों पर बना हुआ है| गोवा की जंगलों मे बना ये मंदिर कदंब वंश की वास्तुकला की आखिरी निशानी है|

कदंब वंश का शासक राजा रामचंद्र का शासन गोवा मे 10वीं शताब्दी से 14वीं शताब्दी के दौरान था और 12वीं सदी मे ही राजा रामचंद्र के मंत्री हेमाद्री ने इस मंदिर का निर्माण करवाया था| इस मंदिर मे किसी किसी जगह पर आपको जैन शैली की छाप दिखाई देगी| कुछ इतिहासकारों का मानना है की इस मंदिर का निर्माण कदंब रानी कमलादेवी ने करवाया था|

मंदिर को जानबूझकर ऐसे जगह बनाया गया है जहाँ पर आसानी से नहीं पहुंचा जा सकता है| ताम्बडी सुरला महादेव मंदिर गोवा के अन्य मंदिरों की अपेक्षा बहुत छोटा प्रतीत होता है| मंदिर को देखकर ऐसा लगेगा की इसका गुंबद का काम पूरा नहीं हो सका था|

तांबडी सुरला मंदिर गोवा की राजधानी पणजी से लगभग 65 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है| ये मंदिर सुंदर काले पत्थरों से बना हुआ है और गणेश चतुर्थी और महाशिवरात्रि के उत्सव पर भारी संख्या मे शिवभक्त इस मंदिर मे दर्शन के लिए पहुंचते हैं|

यदि अप इस मंदिर की वास्तु और डिजाइन को गौर से देखेंगे तो आप समझ पाएंगे की इस मंदिर को बनाने मे कारीगर किस दर्द से गुजरे होंगे| मंदिर का मुख पूरब दिशा की ओर खुलता है और सुबह होते ही सूर्य की किरने भगवान के चरणों पर पड़ती है| इस मंदिर मे आपको भगवान भोले नाथ, परम पिता ब्रह्मा जी और जगत पालक भगवान विष्णु की प्रतिमा देखने को मिलेगी|

इस मंदिर के नजदीक ही कल कल करते सुरला नदी बहती है जो इस मंदिर की सुंदरता मे चार चाँद लगा देती है| मंदिर के गर्भगृह मे एक भव्य और मंत्रमुग्ध कर देने वाला शिवलिंग स्थापित है| ऐसी किवंदिती है की मंदिर के किसी अंधेरे कोने मे एक विशाल नाग निवास करता है|

इस मंदिर भगवान शिव के परम भक्त नंदी की बिना सर वाली मूर्ति है| इस मंदिर मे कदंब शासन को भी हाँथी और घोड़ों के चित्रण से दर्शाया गया है| भारत के सभी प्राचीन मंदिर भारत के इतिहास को दर्शाते हैं|

जितना सनातन धर्म के पूज्य स्थल को तोड़ा और विध्वंश किया उतना नुकसान किसी भी धर्म के साथ नहीं किया गया| जरूरत से ज्यादा करूणा और सेक्यलरिज़म ने हिंदुओं को बहुत आघात पहुंचाया है| जिन आक्रताओं और जिहादियों ने सनातन को नुकसान पहुंचाया उन्ही का महिमामंडन किया जा रहा है|

जब धर्म देखकर लोगों को मारा काटा जा रहा हो उस समय अपने मंदिरों की रक्षा करना बहुत बड़ी बात थी| हमारे पूर्वजों ने पनि जान जोखिम मे डालकर हमारे पूजा स्थलों की रक्षा की है| वैसे तो लोग गोवा मे मौज मस्ती करने जाते हैं लेकिन अच्छा होगा की इस बार अगर आप इस खूबसूरत प्रदेश मे जाएं तो इस प्राचीन मंदिर मे जाकर भगवान शिव के दर्शन जरूर करें|

मंदिर, आस पास के घने जंगल और कल कल करके बहती सुरला नदी आपके मन को आध्यात्मिक शांति पहुंचाएगी| मंदिर ऐसे जगह पर बना हुआ है की यहाँ तक बहुत ही कम लोग पहुँच पाते हैं| मंदिर के चारों तरफ तरफ का वातावरण देखकर आप मंत्रमुग्ध हो जाएंगे|

अगर आप भोलेनाथ के परम भक्त हैं तो आपको अपने जीवन मे एक बार इस मंदिर मे दर्शन करने जरूर आना चाहिए| ये मंदिर शांति, अध्यात्म, प्रकृति और धर्म का अद्भुत संगम है जो आपके तन और मन को पूरी तरह से शुद्ध कर देगा|

ताम्बडी सुरला महादेव मंदिर की टाइमिंग (Tambadi Surla Mahadev Temple Timings)

ताम्बडी सुरला महादेव मंदिर (Tambadi Surla Mahadev Temple) भक्तों के लिए सुबह 8:30 से शाम के 5:30 तक खुला रहता है|

ताम्बडी सुरला महादेव मंदिर कैसे पहुंचे (How To Reach Tambdi Surla Mahadev Temple)

इस मंदिर का नजदीकी हवाई अड्डा डाबोलिम एयरपोर्ट या गोवा एयरपोर्ट है जहाँ से ये मंदिर महज 68 किलोंईटर की दूरी पर स्थित है वहीं नजदीकी रेलवे स्टेशन थिविम है जहाँ से ये मंदिर मात्र 58 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है| अगर आप थिविम रेलवे स्टेशन के लिए ट्रेन टिकट बुक करना चाहते हैं तो यहाँ पर क्लिक करें|

ताम्बडी सुरला महादेव मंदिर का मैप (Tambadi Surla Mahadev Temple Map)

Q1- ताम्बडी सुरला महादेव मंदिर (Tambadi Surla Mahadev Temple) किस नदी के किनारे बना है?

A- सुरला नदी किनारे

Q2- ताम्बडी सुरला महादेव मंदिर (Tambadi Surla Mahadev Temple) का निर्माण किस सदी मे हुआ था?

A- 12वीं सदी मे

Q3- ताम्बडी सुरला महादेव मंदिर (Tambadi Surla Mahadev Temple) का निर्माण किस वंश ने किया था?

A- कदंब वंश ने

Q4- ताम्बडी सुरला महादेव मंदिर (Tambadi Surla Mahadev Temple) किस पत्थर से बना हुआ है?

A- बेसाल्ट पत्थर से

Q5- ताम्बडी सुरला महादेव मंदिर (Tambadi Surla Mahadev Temple) किस शैली मे बना हुआ है?

A- हेमदपंथी शैली में

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